दिल आज शायर हैं!

My poetic venture after a long long time… Hence special to me 🙂
ये मेरी धडकनों का शोर हैं?
        या तुमने चुपकेसे कुछ कहा हैं?

ये मेरी चाहतों की हैं खुशबु?
        या तुम्हारे आने से आँगन महका हैं?

ये मेरे इश्क की आंधी हैं?
        या तुम्हारे एहसास से मौसम बहका हैं?

क्या जानू? कैसा जहां लुट गया हैं?
        और मेरे दिल का क्या हाल हैं?

अब तो साँसे भी चलती नहीं
        बिना तुम्हारी आहटों की इज़ाज़त पाके

दिल भी क्यूँ बहलता नही?
        बिना तुम्हारी निगाहोंसे निगेबान होके

सब कुछ कितना अधुरासा धुंधलासा खोया खोया

सारा समा जैसे करवटे बदलता, न जागा न सोया

तुम शह्जादी सी, ख्वाबों के आशियाने से उतरके हकीकत में आई
कोई नीलमपरी अप्सरा सी मेरी सारी दुनिया पर छा गई

अब ऐसा आलम पाया हैं…
        की मेरी हस्ती मिट गयी
        और मेरा न मुझ में कुछ रहा

बस अब तुम्हारा साया हैं
        तुम्हारी धुप से ही ज़िन्दगी निखरी हैं
        और सोनेको हैं तुम्हारी ही छाया

तुम्हारे आने से ज़िंदगी का मायना बदल गया हैं
और ये आवारा प्रतीक फिर आज शायर बना हैं…

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One thought on “दिल आज शायर हैं!

  1. Vinay Bhalerao April 30, 2010 at 6:10 am Reply

    Boss…..jamalay…:)ata shayar pan…

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