…मुझे पता नहीं

राह चलते हुए किसीका accident होते हुए देखा
वो दुखदायी नज़ारा देखकर मैंने एक लम्बी सी आह भरी
उस आह में उस इंसान और उसके परिवार के लिए हमदर्दी थी ?
या उसकी जगह मैं नहीं था इस बात की राहत थी ?
…मुझे पता नहीं

जब सामाजिक कर्तव्य हेतु भूखे नंगे बच्चोंसे
मिलने जाते हैं लोग और खिंचवाते हैं उनके साथ फ़ोटो
तब इरादा उस अनुभव को कैमरा में कैद करनेका होता हैं ?
या अपनी “social” personality दुनिया को जतानी होती हैं ?
… मुझे पता नहीं

जब बॉम्ब मेरा इलाका छोड़के कहीं और फटता हैं
और मैं बड़े गौर से TV पे “ब्रेकिंग न्यूज़” देखता हूँ
तब ऐसी भीषणता देखकर मन कांप उठता हैं ?
या अपने आप को ज़िंदा पाकर खुशनसीब लगता हैं ?
… मुझे पता नहीं

जब मेरी किसीभी तरह की मदद से, उस कोशिश से
किसीकी ज़िन्दगी में ख़ुशी और मुस्कराहट आ जाती हैं
तब उसकी वह भोली ख़ुशी देखकर दिल खुश हो जाता हैं ?
या “मैं” उस ख़ुशीका कारण बना – ये सोचकर अभिमान होता हैं ?
… मुझे पता नहीं

आज ज़िन्दगी अपने रंग में, अपने ढंग से जीने के कई मौके मिल गये
लेकिन ज़िन्दगी ऐसी भी तो मिली जो औरोंके काम आ सके
तब कही स्वयं से हटकर सकल की तरफ बढ़ना ज़रूरी हैं
अगर इतना पता नहीं, तो ज़िन्दगी का क्या मतलब? क्या मक़सद?
… मुझे पता नहीं

Advertisements

18 thoughts on “…मुझे पता नहीं

  1. Anonymous March 19, 2014 at 1:51 pm Reply

    thoughtful…. nice.. :):)

  2. rahul bhandari March 19, 2014 at 3:54 pm Reply

    nice one!!!

  3. ksinkar March 19, 2014 at 3:55 pm Reply

    बहुत सुन्दर कविता लिखी हैं आपने। ह्रदय के गहराइयों को छू जाते हैं यह पंक्तियां। इंसानी स्वभाव के पाखंडी मिजाज को बहुत खूब दर्शाया हैं आपने इस कविता में।

    • Pratik Munot March 19, 2014 at 4:04 pm Reply

      कौस्तुभ, बहुत बहुत शुक्रिया

  4. Pooja Mutha March 19, 2014 at 4:49 pm Reply

    The above lines beautifully portray the bitter truth of human nature…

  5. shweta parakh March 19, 2014 at 5:51 pm Reply

    Hi pratik .
    its too nice per isme bhi kahi paresh hi dikha aur wo masum harshit and my sweet but sad dismood bhabhi
    anyways well done

    • Pratik Munot March 19, 2014 at 6:46 pm Reply

      Shweta Didi, maine ye point socha hi nahi tha. Abhi bhi bahut bahut bura lagta hain jab uss accident ke baare mein sochte hain

  6. patilprashant153 March 19, 2014 at 7:58 pm Reply

    Mast Lihilay…:)

  7. Bhakti March 19, 2014 at 8:27 pm Reply

    🙂 Hey Pratik,
    Your poem made me sit back and think ….
    Loved it a lot!!!

    • Pratik Munot March 20, 2014 at 1:38 pm Reply

      Thanks so much Bhakti 🙂

      • Bhakti March 20, 2014 at 6:30 pm

        🙂

  8. Rahul Mulchandani March 19, 2014 at 8:44 pm Reply

    very real and very well written pratik 🙂

  9. Sumit Shingavi March 19, 2014 at 9:33 pm Reply

    Very nicely written, Pratik! Such a true thought! Keep posting great lines like this..

    • Pratik Munot March 24, 2014 at 11:59 am Reply

      Sure Sumit. Thank you for encouraging words.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: